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दिल के अनुसार नहीं होता

पांव से कह रहा है

कभी चंपा कभी जूही कभी नर्गिस

ख़्वाब रखता हूँ

न कोई मंजिल के निशां

है ऐसा या वैसा या जैसा नदीश

सारी दुनिया भुला दी

आईना बन जायेगा

ठंडी हवा की आँच