ठहराव

ग़ज़ल की शबनमी छाँव में एक ठहराव...

मेरी तस्वीर

तेरे बगैर

ज़िन्दगी

बिखर जाने दे

दर्द का एक पल

अच्छा है कि

आस की छत

शहर में तेरे

मुद्दतों से जिसे