ग़ज़ल की शबनमी छांव में एक ठहराव

सरापा दास्तां हूँ

चाँद खिल गया

तुम न होगे तो

तेरी आँखों में

गाँव में यादों के

किस तरह बदलते हैं

ओस की बूंदों से

पांव से कह रहा है

याद के पंछी

ख़्वाब रखता हूँ

सिवा प्यार के

आईना बन जायेगा

अश्क़ों के शरारे

गुलाब है ज़िन्दगी

चाहते क्या हो

दीदार सनम का

इतनी यादों की दौलत

दिल मेरा जब

ग़म की झील में

मंज़र दिल का उदास

बुझी आँखों में

चांदनी की तरह

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