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सरापा दास्तां हूँ

चांदनी के फूल

तुम न होगे तो

तेरी आँखों में

गाँव में यादों के

किस तरह बदलते हैं

ओस की बूंदों से

दिल के अनुसार नहीं होता

पांव से कह रहा है

याद के पंछी

ख़्वाब रखता हूँ

न कोई मंजिल के निशां

सिवा प्यार के

सारी दुनिया भुला दी

आईना बन जायेगा

ठंडी हवा की आँच

गुलाब है ज़िन्दगी

ख़्वाब की गलियों में

चाहते क्या हो

दीदार सनम का

यादों की दौलत

जुगनू, खुश्बू, चाँद-सितारे, बादल, गुलशन और फिज़ा

निचोड़ के मेरी पलक को

तुम्हारे हिज़्र में

ग़म की झील में

अक्स ने जैसे ख़ुदकुशी कर ली

मंज़र दिल का उदास

बुझी आँखों में

तुम्हारी यादों से .

चांदनी की तरह