तुम्हारे हिज़्र में

October 28, 2017
गिर रही है आँख से शबनम तुम्हारे हिज़्र में एक ही बस एक ही मौसम तुम्हारे हिज़्र में क़तरे-क़तरे में शरारों सी बिछी है चांदनी  ब...Read More

ग़म की झील में

October 27, 2017
रुख़ से ज़रा नक़ाब उठे तो ग़ज़ल कहूं  महफ़िल में इज़्तिराब उठे तो ग़ज़ल कहूं  इस आस में ही मैंने खराशें क़ुबूल की  काँटों से जब गुल...Read More

मंज़र दिल का उदास

October 16, 2017
मंज़र दिल का उदास अच्छा नहीं लगता तुम नहीं होते पास अच्छा नहीं लगता तेरी क़दबुलन्दी से नहीं इनकार कोई लेकिन छोटे एहसास, अच्छा नहीं...Read More

बुझी आँखों में

October 15, 2017
वफ़ा का फिर सिला धोखा रहा है बस अपना तो यही किस्सा रहा है उन्ही जालों में खुद ही फंस गया अब जिन्हें रिश्तों से दिल बुनता र...Read More

तुम्हारी यादों से .

October 15, 2017
पोशीदा बातों को सुर्खियां बनाते हैं लोग कैसी-कैसी ये कहानियां बनाते हैं जिनमें मेरे ख़्वाबों का नूर जगमगाता है वो मेरे आंसू इक...Read More

चांदनी की तरह

October 14, 2017
प्यार हमने किया जिंदगी की तरह आप हरदम मिले अजनबी की तरह मैं भी इन्सां हूँ, इन्सान हैं आप भी फिर क्यों मिलते नहीं आदमी की त...Read More