ग़ज़ल की शबनमी छांव में एक ठहराव

सिवा प्यार के

आईना बन जायेगा

अश्क़ों के शरारे

गुलाब है ज़िन्दगी

चाहते क्या हो

दीदार सनम का

इतनी यादों की दौलत

दिल मेरा जब

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