न कोई मंजिल के निशां

मिरे वज़ूद को दिल का जो घर दिया तूने
इश्क़ की राह को आसान कर दिया तूने

ख़लिश मैं ओस की महसूस करूं फूलों में
दिल के एहसास को कैसा असर दिया तूने

रहेगी याद ये सौग़ात उम्र भर तेरी
सिर्फ़ आंसू ही सही कुछ मगर दिया तूने

न कोई नक्स-ए-पा है न कोई मंजिल के निशां
मेरी हयात को ये रहगुज़र दिया तूने

ख़ुद अपने घर में ही मेहमान हो गया है नदीश
मेरे एहसास को ऐसा सफ़र दिया तूने

चित्र साभार-गूगल

सिवा प्यार के


भला है बुरा है, है अपनी जगह
मेरा फ़ैसला है, है अपनी जगह

ज़माना भले बेवफ़ा हो मगर
अभी भी वफ़ा है, है अपनी जगह

नहीं प्यार कुछ भी सिवा प्यार के
तेरा सोचना है, है अपनी जगह

नज़ारे हसीं लाख दुनिया के हों
सनम की अदा है, है अपनी जगह

मुलाकातें उनसे हुईं तो बहुत
मगर फ़ासला है, है अपनी जगह

रहे कोशिशें दोस्ती की सदा
ये शिकवा-गिला है, है अपनी जगह

है ऐसा या वैसा या जैसा नदीश
वो सबसे जुदा है, है अपनी जगह

चित्र साभार-गूगल

सारी दुनिया भुला दी

सांसों ने चाहा ओ' दिल ने दुआ दी
मिला साथ तेरा ज़िन्दगी मुस्कुरा दी

सोचा था भुलाऊंगा यादों को तेरी
मगर याद ने सारी दुनिया भुला दी

ग़ज़ब कर दिया मेरे एहसास ने भी
मुहब्बत को तन्हाईयों की सज़ा दी

जिससे भी सीखा हो फूलों ने हँसना
मगर चाहतों को तुम्हीं ने हवा दी

वही कह रहे हैं मुझे बेवफ़ा अब
जिन्हें तोहफ़े में हम ही ने वफ़ा दी

उसकी आरज़ू में नदीश हमने अपनी
उम्र ये सारी तन्हा-तन्हा बिता दी

चित्र साभार-गूगल

आईना बन जायेगा

तू अगर दिल की सुनेगा बावफ़ा बन जायेगा
आज के इस दौर में ये ही सज़ा बन जायेगा

इश्क़ के बारे में कुछ मत पूछ ये ही जान ले
इश्क़ जिस पत्थर को छू ले वो खुदा बन जायेगा

तोड़ने वाले मेरा दिल, सोच ले पहले जरा
दिल नहीं है कोई बूत जो दूसरा बन जायेगा

ग़म अगर मेरे बिखर जाने का तुझको है नदीश
मैं संवर जाऊंगा गर तू आईना बन जायेगा

चित्र साभार-गूगल

अश्क़ों के शरारे

जलते हैं दिल के ज़ख्म ये पाके दवा की आँच
होंठों को है जलाती मेरे अब दुआ की आँच 

अश्क़ों के शरारे समेट कर तमाम रोज
ख़्वाबों को जगाये है मेरे क्यूं मिज़ा की आंच

सोचा था ख्यालों से मिलेगा तेरे सुकून 
लेकर गयी क़रार ये राहत-फ़ज़ा की आँच 

सौदागरी नहीं है, ये है ज़िंदगी मेरी 
रखिये अलग ही इससे नुक्सानो-नफ़ा की आँच 

महफूज़ कहाँ रक्खूँ ये जज़्बात दिल के मैं 
लगती है हर तरफ ही यहाँ तो ज़फ़ा की आँच


दरिया ये कोई आग का आई है करके पार
पिघला रही है मुझको ये ठंडी हवा की आँच 

क्या हो गया है अब तेरे वादों की धूप को
इसमें बची नहीं है ज़रा भी वफ़ा की आँच

लेके नदीश अपने साथ बर्फ़-ए-दर्द चल 
झुलसा ही दे न तुझको ये तेरी अना की आँच


चित्र साभार-गूगल

ज़िन्दगी

कहीं कांटा कहीं गुलाब है ज़िन्दगी
हाँ मुहब्बत पे शबाब है ज़िन्दगी

कोई न देखे तेरा चेहरा कभी
दौर-ए-हाज़िर में नकाब है ज़िन्दगी

तू नहीं तो कुछ नहीं मेरा यहाँ
साथ तेरे लाजवाब है ज़िन्दगी

झूठ को कह ले जो भी सच की तरह
आज उसकी कामयाब है ज़िन्दगी

किसने पायी है उम्र कितनी यहाँ
पल दो पल का हुबाब है ज़िन्दगी

हो सके तो वक़्त को पढ़िए नदीश
सोचकर देखें जवाब है ज़िन्दगी

चित्र साभार-गूगल

हर लम्हां गुजरता है


मुझको मिले हैं ज़ख्म जो बेहिस जहान से 
फ़ुरसत में आज गिन रहा हूँ इत्मिनान से 

आँगन तेरी आँखों का न हो जाये कहीं तर 
डरता हूँ इसलिए मैं वफ़ा के बयान से 

साहिल पे कुछ भी न था तेरी याद के सिवा 
दरिया भी थम चुका था अश्क़ का उफ़ान से 

नज़रों से मेरी नज़रें मिलाता है हर घड़ी 
इकरार-ए-इश्क़ पर नहीं करता ज़ुबान से 

कटती है ज़िन्दगी नदीश की कुछ इस तरह 
हर लम्हां गुज़रता है नये इम्तिहान से

चित्र साभार-गूगल

आरज़ू-ए-ज़िन्दगी करते रहे



यूँ मुसलसल ज़िन्दगी से मसख़री करते रहे
ज़िन्दगी भर आरज़ू-ए-ज़िन्दगी करते रहे 

एक मुद्दत से हक़ीक़त में नहीं आये यहाँ 
ख्वाब कि गलियों में जो आवारगी करते रहे 

बड़बड़ाना अक्स अपना आईने में देखकर 
इस तरह ज़ाहिर वो अपनी बेबसी करते रहे 

रोकने कि कोशिशें तो खूब कि पलकों ने पर 
इश्क़ में पागल थे आंसू ख़ुदकुशी करते रहे 

आ गया एहसास के फिर चीथड़े ओढ़े हुए 
दर्द का लम्हा जिसे हम मुल्तवी करते रहे 

दिल्लगी दिल कि लगी में फर्क कितना है नदीश 
दिल लगाया हमने जिनसे दिल्लगी करते रहे 

चित्र साभार-गूगल

छिपा सकते हो कब तक

भला मायूस हो क्यूँ आशिकी से चाहते क्या हो?
अभी तो आग़ाज़ ही है फिर अभी से चाहते क्या हो?

कहाँ हर आदमी दिल चीर के तुमको दिखायेगा
बताओ यार तुम अब हर किसी से चाहते क्या हो?

फ़क़त हों आपके आँगन में ही महदूदो-जलवागर
घटा से धूप से और चांदनी से चाहते क्या हो?

वफायें रोक लेंगी तुमको मेरी, है यकीं मुझको 
दिखाकर इस तरह की बेरुखी से चाहते क्या हो?

छिपा सकते हो कब तक खुद से खुद को तुम नदीश
चुराकर आँख अपनी आरसी से चाहते क्या हो?



चित्र साभार- गूगल

कैसे यक़ीन उसको हो

खोया है कितना, कितना हासिल रहा है वो
अब सोचता हूँ कितना मुश्किल रहा है वो

जिसने अता किये हैं ग़म ज़िन्दगी के मुझको
खुशियों में मेरी हरदम शामिल रहा है वो

क्या फैसला करेगा निर्दोष के वो हक़ में
मुंसिफ बना है मेरा कातिल रहा है वो

पहुँचेगा हकीकत तक दीदार कब सनम का
सपनों के मुसाफिर की मंज़िल रहा है वो

कैसे यक़ीन उसको हो दिल के टूटने का
शीशे की तिज़ारत में शामिल रहा है वो

तूफां में घिर गया हूँ मैं दूर होके उससे 
कश्ती का ज़िन्दगी की साहिल रहा है वो

ता उम्र समझता था जिसको नदीश अपना
गैरों की तरह आकर ही  मिल रहा वो
चित्र साभार- गूगल

इतनी यादों की दौलत

यूँ भी दर्द-ए-ग़ैर बंटाया जा सकता है
आंसू अपनी आँख में लाया जा सकता है

खुद को अलग करोगे कैसे, दर्द से बोलो
दाग, ज़ख्म का भले मिटाया जा सकता है

मेरी हसरत का हर गुलशन खिला हुआ है
फिर कोई तूफ़ान बुलाया जा सकता है

अश्क़ सरापा ख़्वाब मेरे कहते हैं मुझसे
ग़म की रेत पे बदन सुखाया जा सकता है

पलकों पर ठहरे आंसू पूछे है मुझसे
कब तक सब्र का बांध बचाया जा सकता है

वज्न तसल्ली का तेरी मैं उठा न पाऊं
मुझसे मेरा दर्द उठाया जा सकता है

इतनी यादों की दौलत हो गयी इकट्ठी
अब नदीश हर वक़्त बिताया जा सकता है
चित्र साभार- गूगल

दिल मेरा जब

दिल मेरा जब लेकर तेरा नाम धड़कने लगता है 
वीरां-वीरां आँखों में एक ख्वाब चमकने लगता है 

साँसों की ही खातिर तुझको माँगा है इस जीवन ने 
तुझको न सोचे तो ये दिल यार मचलने लगता है 

चुभ जाते हैं अश्क़ों के कांटे यादों के बिस्तर पे 
नींदों का पतझर आकर बेज़ार दहकने लगता है 

जुगनू, खुश्बू, चाँद-सितारे, बादल, गुलशन और फिज़ा 
जब तुम मेरे पास न हो तो माहौल अखरने लगता है 

कैसे हाल सुनाये अपने दिल का तुमको कहो नदीश 
आँखों से आंसू बनकर ये दर्द छलकने लगता है 
चित्र साभार- गूगल 

निचोड़ के मेरी पलक को

अपने होने के हर एक सच से मुकरना है अभी
ज़िन्दगी है तो कई रंग से मरना है अभी

तेरे आने से सुकूं मिल तो गया है लेकिन
सामने बैठ ज़रा मुझको संवरना है अभी

ज़ख्म छेड़ेंगे मेरे बारहा पुर्सिश वाले
ज़ख्म की हद से अधिक दर्द उभरना है अभी

निचोड़ के मेरी पलक को दर्द कहता है
मकीन-ए-दिल हूँ मैं और दिल में उतरना है अभी

आज उसने किया है फिर से वफ़ा का वादा
इम्तिहानों से मुझे और गुजरना है अभी

बाद मुद्दत के मिले तुम तो मुझे याद आया 
ज़ख्म ऐसे हैं कई जिनको कि भरना है अभी

हुआ है ख़त्म जहाँ पे सफ़र नदीश तेरा 
वो गाँव दर्द का है और ठहरना है अभी
चित्र साभार- गूगल