कहीं कांटा कहीं गुलाब है ज़िन्दगी
हाँ मुहब्बत पे शबाब है ज़िन्दगी

कोई न देखे तेरा चेहरा कभी
दौर-ए-हाज़िर में नकाब है ज़िन्दगी

तू नहीं तो कुछ नहीं मेरा यहाँ
साथ तेरे लाजवाब है ज़िन्दगी

झूठ को कह ले जो भी सच की तरह
आज उसकी कामयाब है ज़िन्दगी

किसने पायी है उम्र कितनी यहाँ
पल दो पल का हुबाब है ज़िन्दगी

हो सके तो वक़्त को पढ़िए नदीश
सोचकर देखें जवाब है ज़िन्दगी

चित्र साभार-गूगल