सारी दुनिया भुला दी

सांसों ने चाहा ओ' दिल ने दुआ दी
मिला साथ तेरा ज़िन्दगी मुस्कुरा दी

सोचा था भुलाऊंगा यादों को तेरी
मगर याद ने सारी दुनिया भुला दी

ग़ज़ब कर दिया मेरे एहसास ने भी
मुहब्बत को तन्हाईयों की सज़ा दी

जिससे भी सीखा हो फूलों ने हँसना
मगर चाहतों को तुम्हीं ने हवा दी

वही कह रहे हैं मुझे बेवफ़ा अब
जिन्हें तोहफ़े में हम ही ने वफ़ा दी

उसकी आरज़ू में नदीश हमने अपनी
उम्र ये सारी तन्हा-तन्हा बिता दी

चित्र साभार-गूगल

Comments

  1. आपकी लिखी रचना  "पांच लिंकों का आनन्द में" रविवार 3दिसंबर2017 को लिंक की गई है.................. http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. वाह!!!!
    लाजवाब....

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  3. बहुत ख़ूब !
    बढ़िया , क्या रचना है

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