है ऐसा या वैसा या जैसा नदीश

भला है बुरा है, है अपनी जगह
मेरा फ़ैसला है, है अपनी जगह

ज़माना भले बेवफ़ा हो मगर
अभी भी वफ़ा है, है अपनी जगह

नहीं प्यार कुछ भी सिवा प्यार के
तेरा सोचना है, है अपनी जगह

नज़ारे हसीं लाख दुनिया के हों
सनम की अदा है, है अपनी जगह

मुलाकातें उनसे हुईं तो बहुत
मगर फ़ासला है, है अपनी जगह

रहे कोशिशें दोस्ती की सदा
ये शिकवा-गिला है, है अपनी जगह

है ऐसा या वैसा या जैसा नदीश
वो सबसे जुदा है, है अपनी जगह

चित्र साभार-गूगल

Comments

  1. वाहहह, क्या बात लाज़वाब रचना
    लोकेश जी

    है ऐसा या वैसा या जैसा नदीश
    वो सबसे जुदा है, है अपनी जगह

    जुदा अंदाजे़ बयां

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  2. रहे कोशिशें दोस्ती की सदा
    ये शिकवा-गिला है, है अपनी जगह
    है ऐसा या वैसा या जैसा नदीश
    वो सबसे जुदा है, है अपनी जगह...
    आदरणीय नदीश जी की बेहतरीन गजलों में से एक.....
    काश! मुझे इसे स्वर देने का अवसर मिल पाता।
    शुभकामनाएँ

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    Replies
    1. धन्यवाद आदरणीय
      आप बेशक स्वर दीजिये इस ग़ज़ल को

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  3. वाह बहुत खूब लिखा है आपने।

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