ग़ज़ल की शबनमी छांव में एक ठहराव

सरापा दास्तां हूँ

चाँद खिल गया

तुम न होगे तो

तेरी आँखों में

गाँव में यादों के

किस तरह बदलते हैं

ओस की बूंदों से

पांव से कह रहा है

याद के पंछी

ख़्वाब रखता हूँ

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