तेरी आँखों में


राह  तकता ही  रहा  ख़्वाब सुनहरा कोई
नींद पे  मेरी लगा  कर  गया  पहरा  कोई

ढूंढती है मेरे एहसास की तितली फिर से
तेरी आँखों  में,  मेरी याद का सहरा कोई

चीखती है मेरी नज़र से ख़ामोशी अब तो
आईना  दे के  मुझे  ले  गया  चेहरा कोई

जो रख दिए हैं कदम, राहे-मोहब्बत में नदीश
फिर जहां लाख सदा दे, नहीं ठहरा कोई

चित्र साभार- गूगल

टिप्पणियां

  1. चीखती है मेरी नज़र से ख़ामोशी अब तो
    आईना दे के मुझे ले गया चेहरा कोई
    बहुत खूब :)

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  2. जी नमस्ते,
    आप की रचना को शुक्रवार 22 दिसम्बर 2017 को लिंक की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

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  3. नए नए सोपान चढ़ती लोकेश जी की ग़ज़ल सीधे दिलो दिमाग़ पर असर करती है।
    वाचक के लिए ऐसी ग़ज़ल बहुत प्रिय बन जाती है जो उससे सीधा संवाद स्थापित करे।
    बधाई एवं शुभकामनाएं लोकेश जी।

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  4. मन को छूते शब्दों व भावों से सजी रचना!

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  5. बहुत सुंदर....उम्दा रचना

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  6. बेहतरीन भावों से सजी बेहतरीन गज़ल .

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  7. लाजवाब प्रस्तुति ! हर शेर बेहतरीन ! बहुत खूब आदरणीय ।

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