ग़ज़ल की शबनमी छाँव में एक ठहराव...


तुम न होगे तो यूँ भी क्या हो जाएगा
कुछ नए ज़ख्मों से राब्ता हो जाएगा

उसको भी तसीरे-उल्फ़त देगी बदल
बेवफ़ा हो तो बावफ़ा हो जाएगा

सीख ली उसने मौसम की अदा
हँसते-हँसते ही वो खफ़ा हो जाएगा

चाहतें अपनी हमने तो कर दी निसार
क्या पता था वो बेवफ़ा हो जाएगा

दर्द मिलते रहें तो न घबरा ऐ दिल
दर्द भी तो कभी दवा हो जाएगा

आप कहें तो कभी मुझको अपना नदीश
दिल क्या ईमान भी आपका हो जाएगा

चित्र साभार- गूगल

8 comments:


  1. तुम न होगे तो यूँ भी क्या हो जाएगा
    कुछ नए ज़ख्मों से राब्ता हो जाएगा

    उसको भी तसीरे-उल्फ़त देगी बदल
    बेवफ़ा हो तो बावफ़ा हो जाएगा....

    बेहतरीन गजल आदरणीय लोकेश जी।

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  2. बहुत खूबसूरत उम्दा रचना।

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  3. वाह्ह्ह....बेहद शानदार गज़ल लोकेश जी।
    भावों का संप्रेषण सहज और सरल तरीके से आपको खूब.आता है।

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  4. दर्द भी तो कभी दवा हो जाएगा ....... बेहतरीन रचना

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