दिल के अनुसार नहीं होता



इन्कार नहीं होता इकरार नहीं होता
कुछ भी तो यहाँ दिल के अनुसार नहीं होता

लेगी मेरी मोहब्बत अंगड़ाई तेरे दिल में
कोई भी मोहब्बत से बेज़ार नहीं होता

अब शोख़ अदाओं का जादू भी चले दिल पर
ऐसे तो दिलबरों का सत्कार नहीं होता

कैसे भुला दूँ, तुझसे, मंज़र वो बिछड़ने का
एहसास ज़िन्दगी का हर बार नहीं होता

सुनकर सदायें दिल की फ़ौरन ही चले आना
अब और नदीश हमसे इसरार नहीं होता

चित्र साभार- गूगल

टिप्पणियां

  1. सुनकर सदायें दिल की फ़ौरन ही चले आना
    अब और नदीश हमसे इसरार नहीं होता
    👌👌👌superb Ghazals

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  2. बहुत रोचक ..उम्दा रचना भाईसाहब ..!!

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  3. खूबसूरत गजल सुंदर अतिसुन्दर।
    शुभ दिवस।

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  4. बहुत लाजवाब गक्ज़ल .. जानदार शेर ...

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  5. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" रविवार 17 दिसम्बर 2017 को साझा की गई है.................. http://halchalwith5links.blogspot.com पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  6. वाह्ह्ह...लाज़वाब गज़ल लोकेश जी।
    बहुत खूब👌

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  7. वाह ! लाजवाब !! एक से बढ़कर एक शेर ! बहुत खूब आदरणीय ।

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  8. कैसे भुला दूँ, तुझसे, मंज़र वो बिछड़ने का
    एहसास ज़िन्दगी का हर बार नहीं होता।
    वाह, बेहतरीन रचना

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