ग़ज़ल की शबनमी छांव में एक ठहराव

तेरा ख़याल

अश्क़ों का बादल

मेरी तस्वीर

तेरे बगैर

ज़िन्दगी

बिखर जाने दे

दर्द का एक पल

अच्छा है कि

आस की छत

शहर में तेरे

मुद्दतों से जिसे

कहकशां

सपने, आँखें, नींद

दर्द का लम्हा

यादों की टिमटिम

मंज़र बहार के

ख़्वाबों को

अनमनी है ज़िन्दगी

काफ़िले दर्द के

दर्द का मौसम

आंसुओं के ज़िस्म का

मगर चाहता हूँ

गुलों की राह के

दर्द से निस्बत

फूल अरमानों का

कहूँ किसको

ये आँखें जब

तहखाने नींद के

कितना बवाल था

रिश्तों की ये पतंग

ख़ुश्बू आँखों में

कुछ नहीं

जलते शहर से

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