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ख़्वाबों का मौसम
साँसों का साथ
चुपके-चुपके
मेरी आँखों को
ज़िन्दगी का मौसम
ग़म की रेत पे
तेरा ख़याल
अश्क़ों का बादल
मेरी तस्वीर
तेरे बगैर
ज़िन्दगी
बिखर जाने दे
दर्द का एक पल
अच्छा है कि
आस की छत
शहर में तेरे
मुद्दतों से जिसे
कहकशां
सपने, आँखें, नींद
दर्द  का  लम्हा
यादों की टिमटिम
मंज़र बहार के
ख़्वाबों को
काफ़िले दर्द के
दर्द का मौसम
आँख में ठहरा हुआ
मगर चाहता हूँ
गुलों की राह के
दर्द से निस्बत
फूल अरमानों का
कहूँ किसको
ये आँखें जब
तहखाने नींद के
मेरे एहसास की तितली
कितना बवाल था
रिश्तों की ये पतंग
ख़ुश्बू आँखों में
कुछ नहीं