शबे-वस्ल तेरी हया का कमाल था
सुबह देखा तो आसमां भी लाल था

कटे हैं यूँ हर पल ज़िन्दगी के अपने
नफ़स नफ़स में वो कितना बवाल था

जवाब देते अहले-जहां को, तो क्या
तुझी से बावस्ता हर एक सवाल था

चमकता है जो मेरी आँखों में अब भी
वो रूहानी पल जो लम्हा-ए-विसाल था

कटे ज़िन्दगी इस तरह कि कहें सब
नदीश सच में जैसा भी था बस कमाल था

चित्र साभार- गूगल