ग़ज़ल की शबनमी छांव में एक ठहराव

शबे-वस्ल तेरी हया का कमाल था
सुबह देखा तो आसमां भी लाल था

कटे हैं यूँ हर पल ज़िन्दगी के अपने
नफ़स नफ़स में वो कितना बवाल था

जवाब देते अहले-जहां को, तो क्या
तुझी से बावस्ता हर एक सवाल था

चमकता है जो मेरी आँखों में अब भी
वो रूहानी पल जो लम्हा-ए-विसाल था

कटे ज़िन्दगी इस तरह कि कहें सब
नदीश सच में जैसा भी था बस कमाल था

चित्र साभार- गूगल

22 comments:

  1. आदरणीय लोकेश जी -- कमाल है इस बवाल में | कोमल भावों से सजे सभी शेर बहुत प्यारे हैं | सादर

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  2. वाह्हह...कमाल बहुत खूब....शनदार ग़ज़ल लोकेश जी👌

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  3. नदीश सच में कमाल है ... महावन शेर सभी ... बवाल
    मचाते हुए जिगर में ...

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  4. वाह खुबसूरत बवाल
    आप की शायरी में डुब कर ,,कर गये कमाल.. सुंदर लयबद्ध रचना।

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  5. वाह बहुत सुंदर

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  6. लाजवाब गजल
    सुन्दर बवाल....
    वाह!!!

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  7. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना सोमवार २२जनवरी २०१८ के विशेषांक के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

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  8. लाज़वाब रचना
    बहुत बहुत बधाई

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  9. नदीश जी सच्च में आप कमाल हैं।

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  10. जी लाजवाब उम्दा कलाम।

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