ये आँखें जब


धुंधला-धुंधला अक़्स ख़ुशी कम दिखती है
ये आँखें जब आईने में नम दिखती है

आ तो गया हमको ग़मों से निभाना लेकिन
हमसे अब हर खुशी बरहम दिखती है

आँखों में चुभ जाते हैं ख़्वाबों के टुकड़े
नींदों में बेचैनी सी हरदम दिखती है

आसमान कितना रोया है तुम क्या जानों
तुमको तो फूलों पे बस शबनम दिखती है

दिल तो टूटा है नदीश का माना लेकिन
जाने-ग़ज़ल मेरी तू क्यों पुरनम दिखती है

चित्र साभार-गूगल

3 comments:

  1. बहुत खूबसूरत रचना👏👏👏👏

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  2. वाह बहुत ही खूबसूरत पुरनम गजल।

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  3. वाह वाह .
    .लफ्जों मैं अहसास भरा है
    गजल बड़ी रूहानी दिखती है

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