कहूँ किसको

दिल की हर बात मैं कहूँ किसको
अपने हालात मैं कहूँ किसको

मैंने खोया तो पा लिया दिल ने
जीत कर मात मैं कहूँ किसको

अश्क़ भी याद भी है, ग़म भी है
इनमें सौगात मैं कहूँ किसको



अब्र के साथ आँख भी बरसे
अबके बरसात मैं कहूँ किसको

तुम नहीं तो नहीं है रंग कोई
दिन किसे रात मैं कहूँ किसको

ज़िस्म बेदिल 'नदीश' सबके यहाँ
अपने जज़्बात मैं कहूँ किसको


चित्र साभार : गूगल

टिप्पणियां

  1. आपकी लिखी रचना "मित्र मंडली" में लिंक की गई है https://rakeshkirachanay.blogspot.in/2018/02/58.html पर आप सादर आमंत्रित हैं ....धन्यवाद!

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  2. दिन और रात किसे कहूँ ...
    कमाल के शेर है सभी ...

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  3. ख़ूबसूरत जज़्बात बयां करती बेहतरीन ग़ज़ल नदीश जी. बधाई एवं शुभकामनायें.

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  4. अश्क़ भी याद भी है, ग़म भी है
    इनमें सौगात मैं कहूँ किसको
    भावों से सजी रचना 🙏

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  5. अश्क़ भी याद भी है, ग़म भी है
    इनमें सौगात मैं कहूँ किसको
    वाह लाजबाव गजल 👌

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  6. बेमिसाल, सुंदर जज्बातों को उकेरती रचना लोकेश जी ।

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