ग़ज़ल की शबनमी छांव में एक ठहराव

ख़्वाबों को

अनमनी है ज़िन्दगी

काफ़िले दर्द के

दर्द का मौसम

आंसुओं के ज़िस्म का

मगर चाहता हूँ

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