मुहब्बत में अपनी असर चाहता हूँ
वफ़ा से भरी हो नज़र चाहता हूँ

तेरा दिल है मंज़िल मेरी चाहतों की
नज़र की तेरी रहगुज़र चाहता हूँ

रहो मेरी आँखों के रु-ब-रु तुम
बस ऐसी ही शामो-सहर चाहता हूँ

कभी बांटकर, मेरी तनहाइयों को
अगर जान लो, किस कदर चाहता हूँ

वफ़ा दौर-ए-हाज़िर में किसको मिली है
मेरे दोस्त तुझसे मगर चाहता हूँ

बनाकर तेरे ख़्वाबों में आशियाँ मैं
करूँ ज़िन्दगी को बसर चाहता हूँ

सफ़र में तुझी को नदीश ज़िन्दगी के
मैं अपने लिए हमसफ़र चाहता हूँ

चित्र साभार- गूगल