ग़ज़ल की शबनमी छांव में एक ठहराव



पल भर तुमसे बात हो गई
ख़ुशियों की सौग़ात हो गई

दुश्मन है इन्सां का इन्सां
कैसी उसकी जात हो गई

आँखों में है एक कहकशां
अश्कों की बारात हो गई

वक़्त, वक़्त ने दिया ही नहीं
बातें अकस्मात हो गई

जख़्म मिले ता-उम्र जो नदीश
रिश्तों की सौग़ात हो गई

चित्र साभार- गूगल

*कहकशां- आकाशगंगा, गैलेक्सी

8 comments:

  1. वाह्ह...लाज़वाब....शानदार....हर शेर बहुत अच्छा है लोकेश जी..हमेशा की तरह...सुंदर गज़ल👌👌

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  2. बहुत सुंदर गजल।

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  3. खूबसूरत अशआर...

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  4. वक़्त किसको वक़्त देता है ...
    मुहब्बत भी तो एक पल में हो जाती है ...
    लाजवाब ग़ज़ल ...

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