साँसों का साथ

मुक्तक


ये करिश्मा मोहब्बत में होते देखा
लब पे हँसी आँख को रोते देखा
गुजरे है मंज़र भी अजब आँखों से
साहिल को कश्तियां डुबोते देखा

* * *
 
पानी से है बिल्कुल खाली सूरत
लोग लिये फिरते हैं जाली सूरत
खाते हैं अक्सर फ़रेब चेहरे से
देखकर सब ये भोली-भाली सूरत

* * *

तेरे ही साथ को साँसों का साथ कहता हूँ
तुझी को मैं, तुझी को कायनात कहता हूँ
तेरी पनाह में गुजरे जो चंद पल मेरे
बस उन्हीं लम्हों को सारी हयात कहता हूँ

* * *
 चित्र साभार- गूगल

हयात-जीवन
कायनात- दुनिया

21 comments:

  1. बहुत ही सुन्दर ।

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  2. बहुत ख़ूब ...
    लाजवाब मुक्तक हैं सभी ...

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  3. वाह्हह... वाह्हह... लाज़वाब..शानदार मुक्तक 👌👌

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  4. पानी से है बिल्कुल खाली सूरत
    लोग लिये फिरते हैं जाली सूरत
    खाते हैं अक्सर फ़रेब चेहरे से
    देखकर सब ये भोली-भाली सूरत
    बहुत ही गूढ बात कह दी है आपने
    अति उत्तम

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  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति

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  6. गुजरे है मंज़र भी अजब आँखों से
    साहिल को कश्तियां डुबोते देखा... सुन्दर

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  7. बहुत सुंदर रचना, लोकेश जी।

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  8. बहुत खूब..👌👌👌 आदरणीय !

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