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मेरी तस्वीर

ख़्वाब की तरह से आँखों में छिपाये रखना
हमको दुनिया की निगाहों से बचाये रखना

बिखर न जाऊँ कहीं टूट के आंसू की तरह
मेरे  वजूद  को  पलकों  पे  उठाये  रखना 

तल्ख़  एहसास से  महफ़ूज रखेगी तुझको
मेरी  तस्वीर  को  सीने  से  लगाये  रखना

ग़ज़ल  नहीं, है  ये  आइना-ए- हयात  मेरी
अक़्स जब भी देखना एहसास जगाये रखना

ग़मों के  साथ मोहब्बत, है  ये आसान नदीश
ख़ुशी की ख्वाहिशों से खुद को बचाये रखना

चित्र साभार- गूगल

तल्ख़- कड़वा
आईना-ए-हयात- जीवन दर्पण

ज़िन्दगी

सैकड़ों खानों में जैसे बंट गई है ज़िन्दगी
साथ रह कर भी लगे है अजनबी है ज़िन्दगी

झाँकता हूँ आईने में जब भी मैं अहसास के
यूँ लगे है मुझको जैसे कि नयी है ज़िन्दगी

न तो मिलने की ख़ुशी है न बिछड़ जाने का ग़म
हाय, ये किस मोड़ पे आकर रुकी है ज़िन्दगी

सीख ले अब लम्हें-लम्हें को ही जीने का हुनर
कौन जाने और अब कितनी बची है ज़िन्दगी

आख़िरी है वक़्त कि अब तो चले आओ सनम
बस तुम्हें ही देखने तरसी हुई है ज़िन्दगी

वस्ल भी है प्यार भी है प्यास भी है जाम भी
फिर भी जाने क्यों लगे है अनमनी है ज़िन्दगी

अब कहाँ तन्हाई ओ' तन्हाई का साया नदीश
उसके ख़्वाबों और ख़्यालों से सजी है ज़िन्दगी

चित्र साभार- गूगल

आईना बन जायेगा

तू अगर दिल की सुनेगा बावफ़ा बन जायेगा
आज के इस दौर में ये ही सज़ा बन जायेगा

इश्क़ के बारे में कुछ मत पूछ ये ही जान ले
इश्क़ जिस पत्थर को छू ले वो खुदा बन जायेगा

तोड़ने वाले मेरा दिल, सोच ले पहले जरा
दिल नहीं है कोई बूत जो दूसरा बन जायेगा

ग़म अगर मेरे बिखर जाने का तुझको है नदीश
मैं संवर जाऊंगा गर तू आईना बन जायेगा

चित्र साभार-गूगल