ग़ज़ल की शबनमी छाँव में एक ठहराव...

छिपा सकते हो कब तक

इतनी यादों की दौलत

दिल मेरा जब

ग़म की झील में

मंज़र दिल का उदास

बुझी आँखों में

चांदनी की तरह