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कितना बवाल था

दर्द कोई जब

कुछ नहीं

जलते शहर से

सरापा दास्तां हूँ

चाँद खिल गया

आप कहें तो कभी

तेरी आँखों में

गाँव में यादों के

किस तरह बदलते हैं

ओस की बूंदों से

दिल के अनुसार नहीं होता

पांव से कह रहा है

कभी चंपा कभी जूही कभी नर्गिस

ख़्वाब रखता हूँ

न कोई मंजिल के निशां

है ऐसा या वैसा या जैसा नदीश

सारी दुनिया भुला दी

आईना बन जायेगा

ठंडी हवा की आँच