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ग़म की रेत पे

August 23, 2018
यूँ भी दर्द-ए-ग़ैर बंटाया जा सकता है आंसू अपनी आँख में लाया जा सकता है ख़ुद को अलग करोगे कैसे दर्द से, बोलो दाग़, ज़ख्म का भले मिटाया ज...Read More