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मौसम है सुहाना दिल का

यादों के हवाले

ये आलम उदास है

मेरी आँखों को

ग़म की रेत पे

अश्क़ों का बादल

मेरी तस्वीर

तेरे बगैर

ज़िन्दगी

बिखर जाने दे

दर्द का एक पल

अच्छा है कि

आस की छत

शहर में तेरे

मुद्दतों से जिसे

कहकशां

सपने, आँखें, नींद

दर्द का लम्हा

यादों की टिमटिम

ख़्वाबों को