ग़ज़ल की शबनमी छाँव में एक ठहराव...

मेरी तस्वीर

तेरे बगैर

ज़िन्दगी

बिखर जाने दे

दर्द का एक पल

अच्छा है कि

आस की छत

शहर में तेरे

मुद्दतों से जिसे

कहकशां

सपने, आँखें, नींद

दर्द का लम्हा

यादों की टिमटिम

ख़्वाबों को

अनमनी है ज़िन्दगी

काफ़िले दर्द के

दर्द का मौसम

आंसुओं के ज़िस्म का

मगर चाहता हूँ

गुलों की राह के