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ज़िन्दगी

June 22, 2018
सैकड़ों खानों में जैसे बंट गई है ज़िन्दगी साथ रह कर भी लगे है अजनबी है ज़िन्दगी झाँकता हूँ आईने में जब भी मैं अहसास के यूँ लगे है ...Read More

गाँव में यादों के

December 20, 2017
नज़र को आस नज़र की है मैकशी के लिये तड़प रहे हैं बहुत आज हम किसी के लिये नहीं लगता है ये मुमकिन मुझे सफ़र तनहा हमसफ़र चाहिये मुझको भ...Read More

किस तरह बदलते हैं

December 17, 2017
टूटा  मेरी  वफ़ा का भरम देखते देखते झूठे  हुए  वादा ओ कसम देखते देखते किस तरह बदलते हैं अपना कहने वाले लोग जीते  हैं  तमाशा ...Read More

ख़्वाब रखता हूँ

December 03, 2017
फैसलों का तेरे ऐ ज़िन्दगी हिसाब रखता हूँ। गुज़िश्ता हर लम्हें की तेरे इक किताब रखता हूँ देखकर चुप हूँ तेरी चश्मे-परेशां ऐ वक़्...Read More

गुलाब है ज़िन्दगी

November 14, 2017
कहीं कांटा कहीं गुलाब है ज़िन्दगी हाँ मुहब्बत पे शबाब है ज़िन्दगी कोई न देखे तेरा चेहरा कभी दौर-ए-हाज़िर में नकाब है ज़िन्दगी ...Read More

ख़्वाब की गलियों में

November 10, 2017
यूँ मुसलसल ज़िन्दगी से मसख़री करते रहे ज़िन्दगी भर आरज़ू-ए-ज़िन्दगी करते रहे  एक मुद्दत से हक़ीक़त में नहीं आये यहाँ  ख़्वाब की ग...Read More