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मगर चाहता हूँ

ख़ुश्बू आँखों में

कुछ नहीं

सरापा दास्तां हूँ

चाँद खिल गया

क्या पता था

तेरी आँखों में

गाँव में यादों के

किस तरह बदलते हैं

ओस की बूंदों से

दिल के अनुसार नहीं होता

पांव से कह रहा है

याद के पंछी

ख़्वाब रखता हूँ

न कोई मंजिल के निशां

सनम की अदा

सारी दुनिया भुला दी

आईना बन जायेगा

अश्क़ों के शरारे

ज़िन्दगी