ग़ज़ल की शबनमी छांव में एक ठहराव

तेरा ख़याल

अश्क़ों का बादल

मेरी तस्वीर

तेरे बगैर

ज़िन्दगी

बिखर जाने दे

दर्द का एक पल

अच्छा है कि

दर्द से निस्बत

कहूँ किसको

ये आँखें जब

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