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बिखर जाने दे

अपनी आँखों के आईने में संवर जाने दे
मुझे समेट ले आकर या बिखर जाने दे

मेरी नहीं है तो ये कह दे ज़िन्दगी मुझसे
चंद सांसें करूँगा क्या मुझे मर जाने दे

दर्द ही दर्द की दवा है लोग कहते हैं
दर्द कोई नया ज़िगर से गुज़र जाने दे

यूँ नहीं होता है इसरार से हमराह कोई
गुज़र जायेगा तन्हा ये सफ़र जाने दे

नदीश आयेगा कभी तो हमसफ़र तेरा
जहां भी जाये मुंतज़िर ये नज़र जाने दे

चित्र साभार- गूगल

इसरार- आग्रह
मुंतज़िर- प्रतीक्षारत

दर्द का एक पल

बिछड़ते वक़्त तेरे अश्क़ का हर इक क़तरा
लिपट के रास्ते से मेरे तर-ब-तर निकला

खुशी से दर्द की आँखों में आ गए आंसू
मिला जो शख़्स वो ख़्वाबों का हमसफ़र निकला

रोज दाने बिखेरता है जो परिंदों को 
उसके तहखाने से कटा हुआ शजर निकला

हर घड़ी साथ ही रहा है वो नदीश मेरे
दर्द का एक पल जो ख़ुशियों से बेहतर निकला

चित्र साभार- गूगल