ग़ज़ल की शबनमी छांव में एक ठहराव

तेरा ख़याल

अश्क़ों का बादल

मेरी तस्वीर

तेरे बगैर

अच्छा है कि

दर्द से निस्बत

तहखाने नींद के

ख़ुश्बू आँखों में

कुछ नहीं

जलते शहर से

सरापा दास्तां हूँ

तुम न होगे तो

तेरी आँखों में

गाँव में यादों के

किस तरह बदलते हैं

ओस की बूंदों से

पांव से कह रहा है

याद के पंछी

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