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मेरी आँखों को

ज़िन्दगी का मौसम

ग़म की रेत पे

तेरा ख़याल

अश्क़ों का बादल

मेरी तस्वीर

तेरे बगैर

बिखर जाने दे

दर्द का एक पल

अच्छा है कि

शहर में तेरे

मुद्दतों से जिसे

दर्द का लम्हा

यादों की टिमटिम

मंज़र बहार के

गुलों की राह के

दर्द से निस्बत

कहूँ किसको

ये आँखें जब

तहखाने नींद के