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याद के पंछी

December 06, 2017
पलक की सीपियों में अश्क़ को गौहर बनाता हूँ मैं तन्हाई की दुल्हन के लिए जेवर बनाता हूँ कभी चंपा कभी जूही कभी नर्गिस की पंखुडियां...Read More