कहीं कांटा कहीं गुलाब है ज़िन्दगी
हाँ मुहब्बत पे शबाब है ज़िन्दगी
कोई न देखे तेरा चेहरा कभी
दौर-ए-हाज़िर में नकाब है ज़िन्दगी
तू नहीं तो कुछ नहीं मेरा यहाँ
साथ तेरे लाजवाब है ज़िन्दगी
झूठ को कह ले जो भी सच की तरह
आज उसकी कामयाब है ज़िन्दगी
किसने पायी है उम्र कितनी यहाँ
पल दो पल का हुबाब है ज़िन्दगी
हो सके तो वक़्त को पढ़िए नदीश
सोचकर देखें जवाब है ज़िन्दगी
चित्र साभार-गूगल
वाह !!! कमाल का कलाम ! बहुत ख़ूबसूरत अंदाज़-ए-बयां। लिखते रहिये।
जवाब देंहटाएंआभार आदरणीय
हटाएंकोई न देखे तेरा चेहरा कभी
जवाब देंहटाएंदौर-ए-हाज़िर में नकाब है ज़िन्दगी
तू नहीं तो कुछ नहीं मेरा यहाँ
साथ तेरे लाजवाब है ज़िन्दगी।
क्या कहने। बहुत शानदार लाज़वाब। सारे मिसरे एक से बढ़कर एक। काफ़िया और रदीफ़ की बेहतरीन बानगी प्रस्तुत करती ग़ज़ल।
आभार आदरणीय
हटाएंवाह्ह्ह.... बहुत ही शानदार गज़ल लोकेश जी👌👌👌
जवाब देंहटाएंआभार श्वेता जी
हटाएंबहुत सुन्दर
जवाब देंहटाएंआभार आदरणीया
हटाएंतू नहीं तो कुछ नहीं मेरा यहाँ
जवाब देंहटाएंसाथ तेरे लाजवाब है ज़िन्दगी
वाआआह लाजवाब
बहुत बहुत शुक्रिया
हटाएंबहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत शुक्रिया
हटाएंबहुत ख़ूब ...
जवाब देंहटाएंहर शेर लाजवाब है ...
बहुत बहुत शुक्रिया
हटाएंपल दो पल का हुबाब है जिंदगी..
जवाब देंहटाएंवाह वाह बेहतरीन, शानदार।
बहुत बहुत आभार
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