जुगनू, खुश्बू, चाँद-सितारे, बादल, गुलशन और फिज़ा


दिल मेरा जब लेकर तेरा नाम धड़कने लगता है 
वीरां-वीरां आँखों में एक ख्वाब चमकने लगता है 

साँसों की ही खातिर तुझको माँगा है इस जीवन ने 
तुझको न सोचे तो ये दिल यार मचलने लगता है 

चुभ जाते हैं अश्क़ों के कांटे यादों के बिस्तर पे 
नींदों का पतझर आकर बेज़ार दहकने लगता है 

जुगनू, खुश्बू, चाँद-सितारे, बादल, गुलशन और फिज़ा 
जब तुम मेरे पास न हो तो माहौल अखरने लगता है 

कैसे हाल सुनाये अपने दिल का तुमको कहो नदीश 
आँखों से आंसू बनकर ये दर्द छलकने लगता है


चित्र साभार- गूगल 

टिप्पणियां

  1. वाह्ह्ह....वाह्ह्ह... बेहद लाज़वाब ग़ज़ल लोकेश जी👌👌👌
    ज़ज़्बातों को शब्दों में पिरोना आपकी लेखनी की खासियत है।बहुत पसंद आयी ग़ज़ल।

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  2. दिल मेरा जब लेकर तेरा नाम धड़कने लगता है
    वीरां-वीरां आँखों में एक ख्वाब चमकने लगता है ...

    Great

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  3. आप की गजलें सचमुच गजल की सभी खूबियों से सजी और गजल के प्रतिमानों पर खरी उतरती है।
    बेहद आकर्षक गजल।

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  4. हमेशा की तरह बहुत सुन्दर ग़ज़ल ।

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  5. चुभ जाते हैं अश्क़ों के कांटे यादों के बिस्तर पे
    नींदों का पतझर आकर बेज़ार दहकने लगता है
    बेहतरीन गजल लोकेश जी

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  6. दर्द आँखों से छलक उठता है .।.
    हर शेर लाजवाब है ... पूरी ग़ज़ल दमदार ।.।

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