फैसलों का तेरे ऐ ज़िन्दगी हिसाब रखता हूँ।
गुज़िश्ता हर लम्हें की तेरे इक किताब रखता हूँ

देखकर चुप हूँ तेरी चश्मे-परेशां ऐ वक़्त
वगरना तेरे हर सवाल का जवाब रखता हूँ

दोस्ती में सुना है अब कहीं वफ़ा ही नहीं
बात ये है कि मैं भी थोड़े से अहबाब रखता हूँ

 उम्मीदो-अश्क़ से बावस्ता हैं आँखें उससे
शिकस्ता ही सही वफ़ा का मैं जो ख़्वाब रखता हूँ

कोई ख़्वाहिश कोई हसरत नहीं खुशी की नदीश
उतर के देख दिल में कितने मैं अज़ाब रखता हूँ

चित्र साभार-गूगल