कुछ नहीं


ग़र मेरे एहसास कुछ नहीं
तो फिर मेरे पास कुछ नहीं

आँखों में ये आँसू तो हैं
हाँ कहने को खास कुछ नहीं

कितने रिश्ते-नाते मेरे
होने का आभास कुछ नहीं

ज़िन्दा जो मेरी सांसों से
उससे भी अब आस कुछ नहीं

अब नदीश मिलने आये हो
ज़िस्म बचा है सांस कुछ नहीं

चित्र साभार- गूगल

Comments

  1. बहुत सुंदर लिखा है आपने

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  2. जी बहुत उम्दा लेखन।

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  3. वाह बहुत सही,

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  4. वाह्ह्ह..जानदार गज़ल👌👌

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  5. आँखों में ये आँसू तो हैं
    हाँ कहने को खास कुछ नहीं वाह शानदार 👌

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  6. लाजवाब ग़ज़ल ।

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  7. बहुत बढ़िया गजल,लोकेश जी।

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