चुपके-चुपके



व्याकुल हो जब भी मन मेरा
तब-तब गीत नया गाता है
आँखों में इक सपन सलोना 
चुपके-चुपके आ जाता है

जीवन के सारे रंगों से 
भीग रहा है मेरा कण-कण
मुझे कसौटी पर रखकर ये
समय परखता है क्यूँ क्षण-क्षण

गड़ता है जो भी आँखों में
समय वही क्यों दिखलाता है

जाने किस पल हुआ पराया
वो भी तो मेरा अपना था 
रिश्ता था कच्चे धागों का
मगर टूटना इक सदमा था

घातों से चोटिल मेरा मन
आज बहुत ही घबराता है

जोड़-जोड़ के तिनका-तिनका 
नन्हीं चिड़िया नीड़ बनती
मिलकर बेबस-बेकस चीटी
इक ताकतवर भीड़ बनती

छोटी-छोटी खुशियाँ जी लो
यही तो जीवन कहलाता है



 चित्र साभार- गूगल

टिप्पणियां

  1. जीवन के सारे रंगों से
    भीग रहा है मेरा कण-कण
    मुझे कसौटी पर रखकर ये
    समय परखता है क्यूँ क्षण-क्षण
    अति सुन्दर.....,

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  2. बहुत ही सुन्दर और भावपूर्ण रचना

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत सुंदर भावपूर्ण रचना,लोकेश जी।

    जवाब देंहटाएं
  4. जोड़-जोड़ के तिनका-तिनका
    नन्हीं चिड़िया नीड़ बनाती
    मिलकर बेबस-बेकस चीटी
    इक ताकतवर भीड़ बनाती

    छोटी-छोटी खुशियाँ जी लो
    यही तो जीवन कहलाता है
    .
    अति उत्कृष्ट रचना सर। आदरणीय लोकेश जी, करवंदन। साहित्य के बारे में ज्यादा कुछ समझ में नहीं आता, इसलिए इस रचना में कुछ मात्रात्मक त्रुटियाँ महसूस कर रहा हूँ। सादर क्षमा माँगते हुए आपसे रचना में अति अल्प मात्रात्मक त्रुटियों पर एक नज़र के लिए अनुरोध करूँगा। उम्मीद है इस धृष्टता को नज़रअंदाज़ कर देंगे🙏

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    1. आपकी यह रचना सराहना से परे है...👌👌👌👏👏👏💐💐💐

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    2. अमित जी बहुत बहुत धन्यवाद
      त्रुटियों की तरफ ध्यान दिलाने के लिये आभार
      अभी मैं सीखने के प्रथम स्तर पर हूँ, तो गलतियां स्वाभाविक हैं, गुणीजनों के मार्गदर्शन में जरूर निखर जाऊंगा।

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  5. जाने किस पल हुआ पराया
    वो भी तो मेरा अपना था
    रिश्ता था कच्चे धागों का
    मगर टूटना इक सदमा था

    वाह वाह बहुत उम्दा लोकेश जी ।

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  6. आपकी लिखी रचना "मित्र मंडली" में लिंक की गई है. https://rakeshkirachanay.blogspot.com/2018/09/86.html पर आप सादर आमंत्रित हैं ....धन्यवाद!

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