कश्कोल लेके आया हूँ, आँखों में आस का
रक्खोगे पास, सिर्फ तुम ही मेरी प्यास का

यादों के हवाले ही, इसे कर दो आख़िरश
कुछ और ही चारा नहीं दिल-ए-उदास का

कर ली है इसलिए भी तो नींदों से दुश्मनी
आँखों में ख़्वाब जागता रहता है ख़ास का

निकला है उसी शख़्स से मीलों का फासला
लगता था मेरे दिल को जो धड़कन के पास का

महसूस ये हुआ है, शब-ए-वस्ल ऐ नदीश
लिपटे हैं आग से बदन लिए कपास का

चित्र साभार- गूगल