रस्ता मुहब्बत का

अपने कुछ ऐसे हैं
पूछो मत कैसे हैं

रस्ता मुहब्बत का
गुल, काँटों जैसे हैं

तुम से क्या मतलब, हम
ऐसे या वैसे हैं

झुक जाएगी दुनिया
खीसे में पैसे हैं?

दुनिया में हम जैसे
बस जैसे-तैसे हैं

चित्र साभार- गूगल

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12 Comments

  1. बहुत ही सुन्दर हृदय स्पर्शी
    सादर

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (22-07-2019) को "आशियाना चाहिए" (चर्चा अंक- 3404) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. उम्दा प्रस्तुती लोकेश जी ।

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  4. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना 24 जुलाई २०१९ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

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  5. वाह!!बहुत खूब लोकेश जी !!

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  6. वाह बहुत खूब...बढ़िया गज़ल लोकेश जी।

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  7. बहुत खूब...
    वाह!!!
    आज कुछ अलग अंदाज में सुन्दर गजल..

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  8. वाह ... छोटी बहर की लाजवाब ग़ज़ल ...

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